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चौधराईन
03-18-2013, 05:42 AM
Post: #131
RE: चौधराईन
उर्मिला देवी कमोड पर से हँसतेहुए, उठते हुए बोली,
"
तो क्या,,?,,मजा नही आया,,,,,???"
बेसिन पर अपने हाथ धोता हुआमदन बोला,
"
वो तो ठीक है पर…दरअसल मुझे कुछ दिखा था जरा आप यहाँ खड़ी हो तो”
और मामी को कमर से पकड़ कर, मुंह की तरफ से दीवार से सटाकर बोला –
“जरा थोड़ा झुको मामी।”
मामी “क्या है रे” कहते हुए झुक गईं।
मदन एक झटके से उसकी मैक्सीऊपर कर दी,अब उनके बड़े बड़े चूतड़ोंके नीचे उनकी गीली बित्ते भर की चूत गीला भोसड़ा साफ़ दिख रहा था। बस फ़िर क्या था मदन ने अपनी शोर्टस् नीचे सरका, फनफनाता हुआलण्डनिकाल कर उस गीले भोसड़े पर लगा जोर काधक्कामार बोला –“ मजा तो अब आयेगाआ,,,,,,!!!।"उर्मिला देवी ' आ उईईइ क्या कर रहा है कंजरे,?,,,,छोड़...' बोलती रही, मगर मदन ने बेरहमी से तीन-चार धक्को में पूरालण्ड पेल दिया और हाथ आगे ले जा कर चूचियाँ थाम निपल मसलते हुए,फ़टा फ़ट धक्के लगाना शुरु कर दिया। पूरा बाथरुम मस्ती भरी सिसकारीयों में डुब गया. दोनो थोड़ी देर में ही झड़ गये। जब चूत से लण्डनिकल गया,तो उर्मिला देवी ने पलट कर मदन को बाहों में भर लिया।
कुछहीदिनो में मदनमाहिर चोदु बन गया था। जब मामा और मोना घर आ गये, तो दोनो दिन में मौका खोज लेते जैसे कि लन्च टाइम में मदन कालेज से आ चोद के चला जाता और छुट्टी वाले दिन कार लेकर, शहर सेथोड़ी दुरी पर बने फार्म हाउस पर काम करवाने के बहाने निकल जाते।जब भी जाते मोना को भी बोलते चलो, मगर वो तो होमवर्क मे व्यस्तहोती थी, मना कर देती। फिर दोनो फार्म हाउस में मस्ती करते।


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03-18-2013, 05:42 AM
Post: #132
RE: चौधराईन
यहाँ तक की कहानी सुना के मदन बोला –“तो चौधराइन चाची ये थी, मेरी ट्रेनिंग़ की कहानी। मुझे मेरी मामी उस्ताद बनाया।” इस गरम कहानी के बीच एक बार चौधराइन चाची चुदास से गरमा कर मदन से चुदवा के मस्त हो चुकीं थीं । पर कहानी खतम होते होते मदन पूरे मूड मे आ चुका था सो मदन ने अपनी एक टांग उठा, उनकी जांघो पर रखते हुए, उसके पैरो को अपने दोनो पैरों के बीच करते हुए, लण्ड को पेटिकोट के ऊपर से चूत पर सटाते हुए, उसके होठों से अपने होठों को सटा उसका मुंह बन्द कर दिया। रसीले होठों को अपने होठों के बीच दबोच, चूसते हुए अपनी जीभ को उसके मुंह में ठेल, उसके मुंह में चारो तरफ घुमाते हुए चुम्मा लेने लगा। कुछ पल तो माया देवी के मुंह से ...उम्म...उम्म... करके गुंगियाने की आवाज आती रही, मगर फिर वो भी अपनी जीभ को ठेल-ठेल कर पूरा सहयोग करने लगी। दोनो आपस में लिपटे हुए, अपने पैरों से एक दूसरे को रगड़ते हुए, चुम्मा-चाटी कर रहे थे। मदन ने अपने हाथ कमर से हटा उसकी चूचियों पर रख दिया था, और ब्लाउज के ऊपर से उन्हे दबाने लगा। माया देवी ने जल्दी से अपने होठों को उसके चुम्बन से छुडाया. दोनो हांफ रहे थे, और दोनो का चेहरा लाल हो गया था। मदन के हाथों को अपनी चूचियों पर से हटाती हुई बोली, “इस्स,हट,,,,,,,क्या करता है…?" मदन ने माया देवी का हाथ को पकड़, अपनी लुंगी के भीतर डाल, अपना लण्ड उसके हाथ में पकड़ा दिया। माया देवी ने अपना हाथ पीछे खींचने की कोशिश की, मगर उसने जबरदस्ती उसकी मुट्ठी खोल, अपना गरम तपता हुआ खड़ा लण्ड उसके हाथ में पकड़ा दिया। लण्ड की गरमी पा कर उसका हाथ अपने आप लण्ड पर कसता चला गया। “…। तेरा मन नही भरता क्या?” लण्ड को पूरी ताकत से मरोड़ती, दांत पीसती बोली। “हाय,,,,,,!!! …एक बार और करने दे…ना,,,,!!”, कहते हुए, मदन ने उसके घुटनो तक सिमट आये पेटिकोट के भीतर झटके से हाथ डाल चूत दबोच ली। माया देवी ने चिहुंक कर लण्ड को छोड़, पेटिकोट के भीतर उसके हाथ से चूत छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली, “इस्स्स्स,,,,,…क्या करता है,,,??…कहाँ हाथ घुसा रहा…???” मदन जबरदस्ती उसकी जांघो के बीच हाथ से चूत को मसलता हुआ बोला, “हाय,,,,,,,,एक बार और…देख ना कैसे खड़ा…??!!” “उफफफ्,,,,,हाथ हटा,,,,,। बहुत बिगड़ गया है, तु…??” मदन का हाथ गीला हो गया था चौधराइन की चूत पनिया गई थी। मदन बोला, “हाय,,,,पनिया गई है,,,,तेरी चु…” माया देवी उसकी कलाई पकड़, रोकने की कोशिश करती बोली, “उफफ्,,,,,छोड़,,,,,ना,,,!,,,,क्या करता है,,,,?…वो पानी तो पहले का है…।" एक हाथ से लुंगी को लण्ड पर से हटाता हुआ बोला, “पहले का कहाँ से आयेगा ??…देख, इस पर लगा पानी तो कब का सुख गया…।" नंगा, खड़ा लण्ड देखते ही चौधराइन, आंखे चुराती, कनखियों से देखती हुई बोली, “तेरा लुंगी से पौंछ गया होगा,,,,,,मेरा अन्दर, कैसे सुखेगा…??”, कहते हुए, मदन के हाथ को पेटिकोट के अन्दर से खींच दिया। पेटिकोट जांघो तक उठ चुका था। लण्ड को अपने हाथ से पकड़, दिखाता हुआ मदन बोला, “…। एक बार और्…तेरी चु…” “चुप,,,बेशरम,,,,बहुत देर हो चुकी है…” “हाय चाची,,,,कहानी कहते कहते मन …बस एक बार और…” “हर बार तू यही कहता है रात भर तु यही करता रहता था, क्या…???” “…तीन…चार…बार तो करता ही था ......छोड़ो उसे …बस एक बार और…”, कहते हुए, फिर से उसके पेटिकोट के भीतर हाथ घुसाने की कोशिश की। “उफफ्,,,,सीईईईई…। कमीने छोड़…। घड़ी देख…। क्या टाईम हुआ…???” मदन ने घड़ी देखी। सुबह के ४:३० बज रहे थे. मदन के किस्से में टाईम का पता ही नही चला था. अब चौधराइन की चूत की बन आई दोपहर में बाप सदानन्द से और हर दूसरे तीसरे दिन किसी बहाने से रात में बगिया वाले मकान में सदानन्द के बेटे मदन से अपनी चूत जम के बजवाती। रोज रात को इसलिए नहीं कि कहीं किसी को शक न हो जाय सो जिस जिस दिन बगिया वाले मकान पे जाने का कोई बहाना न मिलता वो रात भर चुदास से छटपटाती रहती क्योंकि चुदवाने का चस्का जो पड़ गया था। अचानक उनके शैतानी दिमाग ने इसका भी तरीका निकाल लिया। दरअसल चौधरी के मकान में आंगन पीछे की तरफ़ था उसके बाद दीवार थी, जिससे चौधरी साहब का दूसरा मकान जुड़ा था उस मकान में आधे में मवेशी घर था, जहाँ जानवरों के बँधे रहते थे, बाकि के आधे में चौधरी साहब की पँचायत का कमरा था जो पँचायतघर कहलाता था जिसमें जरूरत पड़ने पर शाम को चौधरी साहब पँचायत लगाते थे उस कमरे में दिन दोपहर में कोई भी नहीं रहता था। दिन दोपहर में अक्सर चौधराइन इस कमरे का इस्तेमाल नौकरों का हिसाब किताब करने के लिए करती थीं क्योंकि यहाँ एकान्त रहता था और वो सुकून से अपना हिसाब किताब बिना व्यवधान के कर सकती थी। कमरे में लोगों के बैठने के लिए दरी बिछी थी, एक चौकी थी और उस पर एक गद्दा व गाव तकिया लगे रहते थे, उसी पर बैठ चौधरी पँचायत और चौधराइन नौकरों का हिसाब करती थीं। इस मकान के बाद सड़क थी इसलिये नौकर चाकर बाहर ही बाहर आ जा सकते थे पर चौधरी और चौधराइन अपने मकान के अन्दर से भी आ जा सकते थे । चौधराइन को ये जगह जच गई और कोफ़्त हुआ कि अभी तक उन्हें ये जगह क्यों न सूझी । बस उन्होंने बेला के हाथ वहाँ की अतिरिक्त चाभी दे उससे कहा कि इसे मदन को दे देना और उसे रात बारह बजे के बाद पँचायत घर आने को बोलना । बेला को भी मदन से उस दिन चुदवाने के बाद से मौका नहीं लगा था क्योंकि इस माह कई त्योहार थे उनकी छुट्टियों के कारण उसका मर्द आजकल घर आया हुआ था, और पति को शक हो जाने के डर से बगिया वाले मकान पर जा नही पाई थी, उसे तो जाने का बस बहाना चाहिये था, सो वो खुशी खुशी जाने को राजी हो गयी।

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03-18-2013, 05:43 AM
Post: #133
RE: चौधराईन
मदन दोपहर में बगिया वाले मकान पर खाली बैठा मक्खियाँ मार रहा था क्योंकि जैसा कि मैने पहले बताया इस माह कई त्योहार थे सो उनकी छुट्टियों के कारण गाँव की सभी चुदक्कड़ औरतों के मर्द और भाई बन्द आये हुए थे। पिछले कई दिनों से उसे कोई चूत नहीं मिली थी । बेला को देख उसकी बाछें खिल गई। मदन –“अरे आओ बेला चाची! बहुत दिनों पे दिखाई दीं लगता है इस भतीजे को भूल ही गईं क्या ।” बेला –“ अरे नहीं बेटा! काम काज से छुट्टी ही नहीं मिलती, वो तो आज चौधराइन ने जरूरी बात बताने भेजा है इसलिए छुट्टी मिली।” मदन –“भरी दुपहरी में आई हो अन्दर चलके पानी वानी पी लो बात कहीं भागी नहीं जा रही सुन लूंगा।” बेला समझ गई कि मदन आज बिना चोदे न जाने देगा, चाहती वो भी यही थी सो मन ही मन खुश होकर पर ऊपर से नखरा दिखा बोली –“ अच्छा बेटा! भगवान भला करे पर मैं हुँ जरा जल्दी में चौधराइन का बड़ा काम फ़ैला छोड़ के आई हूँ।” ऐसे बोल अन्दर को चल दी जबकि वो चौधराइन को बोल के आई थी कि उसे कुछ दूसरे घरों का काम निबटाना है सो अब वो अगर आ सकी तो शाम को छ: सात बजे के करीब आयेगी। मदन उसके अपने भारी चूतड़ों और पपीते सी विशाल चूचियों को ललचाई आँखों से घूरते पीछे पीछे अन्दर आया और दरवाजा अन्दर से बन्द कर उसे पानी दिया और पूछा –“अब बताओ क्या कहलवाया है चाची ने ।” मदन को अन्दर आ दरवाजा बन्द करते देख बेला अर्थ पूर्ण ढ़ंग से मुस्कुराई और बोली –“चौधराइन ने ये पँचायत घर की चाभी भिजवाई है और रात बारह बजे वहाँ आने को कहा है। अभी आराम कर रात में मजे करना । मदन ने चाभी ले ली और बेला को बिस्तर पर गिराते हुए बोला –“अरे मैं तो आराम ही कर रहा था तुम भी तो थोड़ा आराम कर लो चाची । बेला –“ अरे अरे क्या कर रहे हो बेटा अपनी ये ताकत रात के लिए बचा के रख। दरवाजा खोल दे और मुझे जाने दे।” मदन –“ रात के लिए अभ्यास तो करा दो चाची । बेला –“अरे जाने दे बेटा तुझे किसी अभ्यास की जरूरत नहीं, मैं क्या जानती नहीं ।” बेला के इस अरे अरे और बात चीत के बीच मदन ने फ़ुर्ती से उसकी नाभी के पास हाथ डाल उसकी धोती की प्लेटें(चुन्नटें) बाहर निकाल और पेटीकोट का नारा खींच धोती और पेटीकोट एक ही झटके में निकाल फ़ेंका और अगले ही क्षण बेला सिर्फ़ ब्लाउज में नंगधड़ग बिस्तर पर पड़ी थी। तभी मदन बड़े बड़े चूतड़ माँसल जाघें देख उसके ऊपर कूदा तो बेला हँसते हुए बोली –“आराम से मदन बेटा मैं क्या कहीं भागी जा रही हूँ।” मदन (उसका ब्लाउज खोलते हुए) –“ अभी तो कह रही थीं कि चौधराइन चाची का बड़ा काम फ़ैला छोड़ के आई हो, अब कह रही हो क्या मैं कहीं भागी जा रही हूँ बेला(मुस्कुराते हुए दोनो हाथ ऊपर कर ब्लाउज उतारने में मदद करते हुए) –“अरे वो तो मैं तुझे चिढ़ा रही थी मैं तो चौधराइन से बोल के आई हूँ कि कुछ दूसरे घरों का काम निबटाना है सो अब तो शाम को छ: सात बजे के करीब आऊँगी। मदन(उसकी ब्रा उतारते हुए) –“फ़िर क्या मजे लो, पर ये क्या चाची तुम भतीजे चिढ़ा के तड़पाती हो । बेला(मुस्कुरा के) –“जब भतीजे से चुदवा ही लिया तो चिढ़ा के तड़पाने मे क्या है तड़पने मे जोश बढ़ता है। ब्रा उतरते ही बेला की बड़ी बड़ी चूचियाँ फ़ड़फ़ड़ाई मदन ने जिन्हे मदन ने दोनों हाथों मे दबोच उनपर मुँह मारते हुए कहा –“तो चाची अब देखो मेरा जोश।” मदन ने पिछले दो दिन बिना चूत के बिताये थे सो बेला चाची को खूब पटक पटक के चोदा । मारे मजे के बेला मालिन ने अपने भारी चूतड़ उछाल उछाल के किलकारियाँ भर भर के चुदवाया। शायद रात में मनपसन्द चौधराइन की चूत मिलने की सोच सोच कुछ ज्यादा ही जोश मे चोदा । उसके बाद भी मदन ने उसे जाने न दिया और उसकी सेर सेर भर की चूचियाँ थाम, उसकी मोटी मोटी जाँघों और बड़े बड़े चूतड़ों के बीच अपना लण्ड दबा के चिपक के शाम साढ़े चार बजे तक सोया। उस रात मदन पँचायतघर करीब पौने बारह बजे पहुँचा। दरवाजा खोल के अन्दर गया और गद्दा व गाव तकिया लगी चौकी पर बैठ गया । करीब बारह बजे चौधराइन घर के अन्दर से वहाँ आयीं और उसी चौकी पर बेखटके इत्मीमान से मदन से लिपट लिपट रात भर सोईं मतलब चुदवाती सोती जागती रहीं और सुबह होने से पहले बिना किसी को शक हुए अन्दर ही अन्दर अपने घर अपने कमरे में वापस चली गई। पँचायतघर का इन्तजाम देख उसने मन ही मन चौधराइन के दिमाग की दाद दी। अब क्या था दोपहर को सदानन्द, रात में मदन, चौधराइन की चूत को पूरा आराम सुकून हो गया ।

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03-18-2013, 05:43 AM
Post: #134
RE: चौधराईन
अचानक एक दिन के 11 बजे चौधराइन ने मदन को बुला भेजा। मदन को ताज्जुब हुआ क्योंकि इस समय आमतौर पे उसके पिता पण्डित सदानन्द का बुलावा आता था। नौकरानियां घर के काम में व्यस्त थीं, कम उम्र के बच्चे इधर-उधर दौड़ रहे थे और आंगन में कुछ नौकर सफाई कर रहे थे। पता चला कि चौधरी साहब खेत पर जा चुके हैं। मदन चौकी पर आराम से बैठ गया। तभी चौधराइन आई और मदन के बगल में बैठ गई। माया देवी(चौधराइन) ने उसका हाथ पकड़ कर एक लड़के की तरफ इशारा करके पूछा,"वो कौन है मदन?" वो लड़का आंखें नीची करके अनाज बोरे में डाल रहा था। उसने सिर्फ हाफ-पैंट पहन रखा था। "हां, मैं जानता हूँ, वो गोपाल है, श्रीपाल का भाई !" मदन ने चौधराइन को जवाब दिया। श्रीपाल मदन के घर का पुराना नौकर था और पिछले 8-9 सालों से काम कर रहा था। चौधराइन उसको जानती थी। मदन ने पूछा,"क्यों, क्या काम है उस लड़के से?" चौधराइन ने इधर उधर देखा और अपने कमरे में चली गई। एक दो मिनट के बाद उन्होंने मदन को इशारे से अन्दर बुलाया। वो अन्दर गया और मायादेवी ने झट से हाथ पकड़ कर कहा,"बेटा, मेरा एक काम कर दे... पर देख किसी को पता न चले।" "बताइये चाची! कौन सा काम ?" जवाब में उन्होंने जो कहा वो सुनकर मदन हक्का बक्का रह गया। "बेटा, मुझे गोपाल से चुदवाना है...!" मदन चौधराइन को देखता रह गया। उसने कितनी आसानी से बेटे के उम्र के लड़के से चुदवाने की बात कह दी..... "क्या कह रही हो.....ऐसा कैसे हो सकता है...." मदनने कहा। "मैं कुछ नहीं जानती, जब से तुझसे चुदवाया है मुझे छोटी उमर के लड़कों से चुदवाने का चस्का लग गया है, मैं सुबह से अपने को रोक रही थी, उसको देखते ही मेरी चूत गरम हो चुलबुलाने लगती है, मेरा मन करता है की नंगी होकर सबके सामने उसका लण्ड अपनी चूत के अन्दर ले लूँ !" चौधराइन ने मदन के सामने अपनी चूत को ऊपर से खुजाते हुए कहा,"कुछ भी करो, बेटा गोपाल का लण्ड मुझे अभी चूत के अन्दर चाहिए !" चौधराइन की बातें सुनकर मदन का सर चकराने लगा था। मदनने कभी नहीं सोचा था कि चौधराइन, इतनी आसानी से दूसरे लड़कों के बारे में उससे बात करेगी। वो सोचने लगा कि गोपाल, अपने से 20-22 साल बड़ी, चौधराइन, उसकी ही उमर की लड़की की अम्मा को कैसे चोद पायेगा। मुझे लगा कि गोपाल का लण्ड अब तक चुदाई के लिये तैयार नहीं हुआ होगा। "चौधराइन, वो गोपाल तो अभी बहुत छोटा है.. वो तुम्हें नहीं चोद पायेगा...." मदन ने चौधराइन की बड़े कटीले लंगड़ा आम के साइज की चूची पर हाथ फेरते हुए कहा,"चलिये आपका बहुत मन कर रहा है तो मैं इसी वख्त आपकी चोद देता हूँ..!" मदन चूची मसल रहा था, चौधराइन ने उसका हाथ अलग नहीं किया। "बेटा, तू तो चोदता ही है फ़िर चोद लेना, लेकिन पहले गोपाल से मुझे चुदवा दे...अब देर मत कर ....बदले में तू जो बोलेगा वो सब करुंगी... तू किसी और लड़की या औरत को चोदना चाहता है तुझे आज से पूरी छूट है यहाँ तक कि अगर तू कहेगा तो मैं गाँव की चौधराइन हूँ, खुद उसका इंतज़ाम कर दूंगी, लेकिन तू अभी अपनी चौधराइन चाची को गोपाल से चुदवा दे.. मेरी चूत बुरी तरह गीली हो रही है।, तुझे बस उसे पँचायतघर में लेके आना है। बाकि मैं देख लूँगी। " पँचायतघर का नाम सुन मदन का दिमाग सन्नाटे में आ गया । उसने मन ही मन चौधराइन के दिमाग की दाद दी । चौधराइन ने खुद से चुदाई की पेशकश की है तो कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ेगा। मदन ने चौधराइन चाची को अपनी बांहों में लेकर उसके टमाटर जैसे गालों को चूमा और उनकी दोनों मस्त लंगड़ा आमों जैसी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से सहलाते हुए कहा," आप थोड़ा इन्तज़ार करें...मैं कुछ करता हूँ !" यह कहकर वो बाहर निकल कर आ गया। उसने करीब पाँच दस मिनट इधर उधर घूमकर समय बिताया ताकि चौधराइन को लगे कि उसने उनके काम के लिए काफ़ी जोड़ तोड़ मेहनत की है फ़िर वो वापस आया। चौधराइन अपने कमरे में मिलीं मदन उनके बगल में बैठ गया और कहा कि वो दस मिनट के बाद पँचायतघर में पहुँचे ,वहाँ से उठ कर वो आंगन में ग़ोपाल के पास आया, उसने देखा चौधराइन भी पीछे बाहर आंगन में आ गई थीं। उसने गोपाल की पीठ थप-थपा कर साथ आने को कहा। वो बिना कुछ बोले साथ हो लिया। मदन ने कनखियों से देखा चौधराइन के चेहरे पर मुस्कान आ गई थी। गोपाल को लेकर पँचायतघर में आया और दरवाज़ा खुला रहने दिया। मदन आकर गद्दे पर लेट गया और गोपाल से कहा कि मेरे पैर दर्द कर रहे हैं, दबा दे.. यह कहते हुये उसने अपना पजामा बाहर निकाल दिया। नीचे उसने जांघिया पहना था। ग़ोपाल पांव दबाने लगा और मैं उससे उसके घर की बातें करने लगा। वैसे तो गोपाल के घरवाले मदन के घर में सालों से काम करते हैं फिर भी वो कभी उसके घर नहीं गया था। गोपाल की दादी को भी उसने अपने घर में काम करते देखा था और अभी उसकी माँ और भैया काम करते हैं। गोपाल ने बताया कि उसकी एक बहन है और उसकी शादी की बात चल रही है। वो बोला कि उसकी भाभी बहुत अच्छी है और उसे बहुत प्यार करती है। अचानक मदन ने उससे पूछा कि उसने अपने भाई को अपनी बीबी यानि के तेरी भाभी को चोदते देखा है कि नही। ग़ोपाल शरमा गया और जब मदनने दोबारा पूछा तो जैसा उसने सोचा था, उसने कहा कि हाँ उसने चोदते देखा है। मदन ने फिर पूछा कि चोदने का मन करता है या नहीं? तो उसने शरमाते हुये कहा कि जब वो कभी अपनी भाभी को अपने भैया से चुदवाते देखता है तो उसका भी मन चोदने को करता है। ग़ोपाल ने कहा कि रात में वो अपनी माँ के कमरे में सोता था । लेकिन पिछले एक साल से भैया भाभी की चुदाई देख कर उसका भी लण्ड टाईट हो जाता है। इसलिए वो अब अलग सोता है। "फिर तुम अपनी भाभी को ही क्यों नहीं चोद देते..." मदन ने पूछा, लेकिन गोपाल के जबाब देने के पहले चौधराइन मायादेवी कमरे में आ गई और उसने अन्दर से दरवाजा बन्द कर दिया। ग़ोपाल उठकर जाने लगा तो मदन ने उसे रोक लिया। गोपाल ने एक बार चौधराइन के तरफ देखा और फिर पैर दबाने लगा। "क्या हुआ चौधराइन चाची?" "अरे बेटा, मेरे पैर भी बहुत दर्द कर रहे है, थोड़ा दबा दे !" मायादेवी बोलते बोलते मेरे बगल में लेट गई। मदन उठ कर बैठ गया और चौधराइन को बिछौने के बीचोंबीच लेटने को कहा। मदन चौधराइन का एक पैर दबाने लगा ।

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03-18-2013, 05:43 AM
Post: #135
RE: चौधराईन
ग़ोपाल चुपचाप खड़ा था। उससे मदन ने दूसरा पैर दबाने के लिये कहा लेकिन वो खड़ा ही रहा। "अरे ग़ोपाल, तुम खड़े हो क्यों, दूसरा पांव दबाते क्यों नहीं चलो दबाओ !" चौधराइन माया देवी ने जब अपनी सधी आवाज में आदेश दिया तो गोपाल दूसरे पांव को दबाने लगा। चौधराइन ने मदन को मुस्कुरा के आंख मारी। " चौधराइन चाची, कहाँ कहाँ दर्द कर रहा है?" "अरे पूछ मत बेटा, पावों में कमर के नीचे और छाती में दर्द है, खूब जोर से दबाओ।" चौधराइन ने खुल कर जाँघों, चूतड़ों और बड़ी बड़ी चूचियाँ दबाने का निमंत्रण दे दिया था। मदन पाँव से लेकर कमर तक मसल मसल कर मजा ले रहा था जब कि गोपाल सिर्फ घुटनों तक ही दबा रहा था। मदन ने गोपाल का हाथ पकड़ा और चौधराइन की जांघों के ऊपर सहलाया और कहा कि तुम भी नीचे से ऊपर तक दबाओ। वो हिचका लेकिन मुझे देख देख कर वो भी मायादेवी की शानदार सुडोल गुदाज जांघों लम्बी लम्बी टांगों को नीचे से ऊपर तक मसलने लगा। 2-3 मिनट तक इस तरह से मजा लेने के बाद मदन ने कहा,"चाची साड़ी उतार दें...तो और आसानी होगी..." "अच्छा, बेटा,..." "गोपाल, साड़ी खोल दे।" चौधराइन का आदेश गूँजा। उसने चौधराइन की ओर देखा लेकिन साड़ी खोलने के लिये हाथ आगे नहीं बढ़ाया। "गोपाल, शरमाते क्यों हो, तुमने तो कई बार अपनी भाभी को नंगी चुदवाते देखा है...यहां तो सिर्फ साड़ी उतारनी है, चल खोल दे।" और चौधराइन ने का गोपाल का हाथ पकड़ कर साड़ी की गांठ पर रखा। उसने शरमाते हुये गांठ खोली और मदन ने साड़ी चौधराइन के बदन से अलग कर दी। काले रंग के ब्लाऊज़ और साया में गजब की माल लग रही थी। गोपाल को अपनी तरफ़ देखते देख चौधराइन मुस्कुराई, “क्या देख रहा है गोपाल? "मालकिन, आप बहुत सुन्दर हैं..." अचानक गोपाल ने कहा और प्यार से जांघों को सहलाया। "तू भी बहुत प्यारा है.." माया ने जबाब दिया और हौले से साया को अपनी घुटनों से ऊपर खींच लिया। चौधराइन के सुडौल पैर और पिंडली किसी भी मर्द को गर्म करने के लिये काफी थे। वो दोनों पैर दबा रहे थे लेकिन उनकी नजर चौधराइन की मस्त, बड़ी बड़ी मांसल चूचियों पर थी। लग रहा था जैसे कि चूचियां ब्लाऊज़ को फाड़ कर बाहर निकल जायेंगी। मदन का मन कर रहा था कि फटाफट चौधराइन को नंगा कर चूत मे लण्ड पेल दे। लण्ड भी चोदने के लिये तैयार हो चुका था। और इस बार घुटनों के ऊपर हाथ बढा कर मदन ने हाथ साया के अन्दर घुसेड़ दिया और मखमली जांघों को सहलाते हुये चूत पर हाथ रखा। फ़ूली हुई खूब बड़ी सी करीब बित्ते भर की मुलायम चिकनी चूत। अच्छा तो चौधराइन ने झाँटे साफ़ कर दीं थीं। मदन से रहा नहीं गया मसल दिया। एक नहीं, दो नहीं, कई बार लेकिन चौधराइन ने एक बार भी मना नहीं किया। मदन ने महसूस किया सहलाने से उत्तेजित हो उनकी पुत्तियाँ उभर आयीं और चूत पानी छोड़ने लगी चौधराइन साया पहने थी और चूत दिखाई नहीं पड़ रही थी। साया ऊपर नाभी तक बंधा हुआ था। मदन उनकी चिकनी की हुई चूत को देखना चाहता था। एक दो बार चूत को फिर से मसला और हाथ बाहर निकाल लिया। " चौधराइन चाची, साया बहुत कसा बंधा हुआ है, थोड़ा ढीला कर लो.. " मदन ने देखा कि गोपाल अब आराम से मायादेवी की जांघों को सहला मसल रहा था। गोपाल से कहा कि वो साये का नाड़ा खोल दे। तीन चार बार बोलने के बाद भी उसने नाड़ा नहीं खोला तो मदन ने ही नाड़ा खींच दिया और साया ऊपर से ढीला हो गया। मदन पांव दबाना छोड़कर चौधराइन की कमर के पास आकर बैठ गया और साये को नीचे की तरफ ठेला। पहले तो उसका चिकना पेट दिखाई दिया और फिर नाभि। मदन ने कुछ पल तो नाभि को सहलाया और साया को और नीचे की ओर ठेला। अब उसकी कमर और चूत के ऊपर का फ़ूला हुआ भाग दिखाई पड़ने लगा। अगर एक इंच और नीचे करता तो चूत दिखने लगती।

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03-18-2013, 05:43 AM
Post: #136
RE: चौधराईन
"आह बेटा, छाती में बहुत दर्द है.." माया ने धीरे से कहा । साया को वैसा ही छोड़कर मदनने अपने दोनों हाथ चौधराइन के मस्त और गुदाज लंगड़ा आमों (चूचियों) पर रखे और दबाया। गोपाल के दोनों हाथ अब सिर्फ जांघो के ऊपरी हिस्से पर चल रहा था और वो आंखे फाड़ कर देख रहा था कि ये लड़का कैसे चौधराइन की चूचियां दबा रहा है। " चौधराइन चाची, ब्लाउज खोल दो तो और आसानी होगी" मदन ने दबाते हुए कहा। "तो खोल दे न " उसने जबाब दिया और मदन ने झटपट ब्लाउज के सारे बटन खोल डाले और ब्लाउज और ब्रा को चौधराइन की चूचियों से अलग कर दिया। ब्रा हटते ही लेटी हुई चौधराइन के नुकीले मस्त और गुदाज लंगड़ा आम अपने भार से गोल हो, बड़े बड़े खरबूजों में बदल गये, देख कर मदन झनझना गया और जम कर उन्हें दबाने मसलने लगा और ग़ोपाल से कहा, "कितनी ठोस है, लगता है जैसे गेंद में किसी ने कस कर हवा भर दी है।" फ़िर घुन्डी को मसल के बोला " क्यों गोपाल कैसा लग रहा है?" मदन जोर जोर से चूचियों को दबा रहा था। अचानक मदन ने देखा कि गोपाल का एक हाथ चौधराइन की दोनों जांघों के बीच साया के ऊपर घूम रहा है। मदन ने एक हाथ से चूची दबाते हुए गोपाल का वो हाथ पकड़ा और उसे चौधराइन की नाभि के ऊपर रख कर दबाया। "देख, चिकना है कि नहीं?" ये कह मदन उसके हाथ को दोनों जांघों के बीच चूत की तरफ धकेलने लगा। अचानक मदन चौधराइन के ऊपर झुका और घुन्डी को चूसने लगा। तभी चौधराइन ने फुसफुसाकर मदन के कान में कहा, "बेटा, तू थोड़ी देर के लिये बाहर जा और देख कोई इधर ना आये.." मदन ने निपल चूसते चूसते गोपाल के हाथ के ऊपर अपना हाथ रख कर साया के अन्दर ठेला और गोपाल का हाथ चौधराइन के चूत पर आ गया। उसने गोपाल के हाथ को दबाया और गोपाल चूत को मसलने लगा । कुछ देर तक दोनों ने एक साथ चूत को मसला और फिर मदन खड़ा हो गया। ग़ोपाल का हाथ अभी भी चौधराइन की चूत पर था लेकिन साया के नीचे चूत दिख नहीं रही थी। मदन ने अपना पजामा पहना और गोपाल से कहा,"जब तक मैं वापस नहीं आता, तू इसी तरह मालकिन को दबाते रहना। दोनों चूचियों को भी खूब दबाना।" मदन दरवाजा खोल कर बाहर आ गया और पल्ला खींच दिया। आस पास कोई भी नहीं था। वो इधर उधर देखने लगा और अन्दर का नजारा देखने की जगह ढूंढने लगा। जैसा हर घर में होता है, दरवाजे के बगल में एक खिड़की थी। उसके दोनों पल्ले बन्द थे। हलके से धक्का दिया और पल्ला खुल गया। बिस्तर साफ साफ दिख रहा था। चौधराइन ने गोपाल से कुछ कहा तो वो शरमा कर गर्दन हिलाने लगा। मायादेवी ने फिर कुछ कहा और गोपाल सीधा बगल में खड़ा हो गया। माया ने उसके लण्ड पर पैंट के ऊपर से सहलाया और ग़ोपाल झुक कर साया के ऊपर से चूत को मसलने लगा। एक दो मिनट तक लण्ड के ऊपर हाथ फेरने के बाद माया ने पैंट के बटन खोल डाले और गोपाल का साढ़े सात इन्च लम्बा लण्ड फ़नफ़ना के बाहर आ गया। मदन ने सपने में भी नही सोचा था कि इस जरा से लड़के का लण्ड इतना बड़ा होगा । चौधराइन ने झट से उसका टनटनाया हुआ लण्ड पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी। चौधराइन को मालूम था कि मदन जरुर देख रहा होगा, सो उसने खिड़की के तरफ देखा। नजर मिलते ही वो मुस्कुरा दी और लण्ड को दोनों हाथों से हिलाने लगी। गोपाल का लण्ड देख कर वो खुश थी। उधर गोपाल ने भी चूत के ऊपर से साये को हटा दिया तो आज मदन ने भी पहली बार उनकी साफ़ चिकनी की हुई चूत देखी शायद आज ही झांटें साफ की होंगी। उनकी चूत करीब बित्ते भर की फ़ूली हुई मुलायम चुद चुद के हल्की साँवली पड़ गई उत्तेजना से बाहर उठी पुत्तियों वाला टाइट भोसड़ा लग रही थी । जिसे मदन की आंखों के सामने एक लड़का मसल रहा था। मायादेवी ने कुछ कहा तो गोपाल ने साया बिलकुल बाहर निकाल दिया। अब वो पूरी नंगी थी। शानदार सुडोल संगमरमरी गुदाज और रेशमी चिकनी जांघों के बीच दूध सी सफ़ेद पावरोटी सा भोसड़ा अपने मोटे मोटे होठ खोले लण्ड का इन्तजार करता हुआ लग रहा था। मायादेवी लण्ड की टोपी खोलने की कोशिश कर रही थी। उसने गोपाल से फिर कुछ पूछा और गोपाल ने ना में गर्दन हिलाई। शायद पूछा हो कि पहले किसी को चोदा है या नहीं। माया ने गोपाल को अपनी ओर खींचा और खूब जोर जोर से चूमने लगी और चूमते-चूमते उसे अपने ऊपर ले लिया। अब मायादेवी की चूत नहीं दिख रही थी। उन्होंने अपना हाथ नीचे की ओर बढ़ाया और अपने हाथ से लण्ड के सुपाड़े को चूत के मुहाने पर रखा। माया देवी ने गोपाल से कुछ कहा और वो दोनों चूची पकड़ कर धीरे धीरे धक्का लगा कर चुदाई करने लगा। गोपाल अपने से 20 साल बड़ी गांव की सबसे मस्त सुन्दर और इज्जतदार औरत की चुदाई कर रहा था। मदन अपने लण्ड की हालत को भूल गया और उन दोनों की चुदाई देखने लगा। गोपाल जोर जोर से धक्का मार रहा था और चौधराईन भी अपने भारी चूतड़ उछाल उछाल अपने बेटे की उम्र के लड़के से चुदाई का मजा ले रही थी। यूँ तो गोपाल के लिये चुदाई का पहला मौका था । मदन देखता रहा और गोपाल जम कर चौधराइन चाची को चोदता रहा और करीब 15 मिनट के बाद वो चौधराइन के गुदाज बदन पर ढीला हो गया। मदन 2-3 मिनट तक बाहर खड़ा रहा और फिर दरवाजा खोल कर अन्दर आ गया। मुझे देखते ही गोपाल हड़बड़ा कर नीचे उतरा और अपने हाथ से लण्ड को ढक लिया। लेकिन मायादेवी ने उसका हाथ अलग किया और मदन के सामने ही गोपाल के लण्ड को सहलाने लगी। चौधराइन बिल्कुल नंगी थी। उसने दोनों टांगों को फैला रख्खा था और मुझे अपनी चूत की खुली फांके साफ साफ दिखा रही थीं। मदन उनकी कमर के पास बैठ कर चूत को सहलाने के ख्याल से हाथ लगा। चूत गोपाल के रस से पूरी तरह से गीली हो गई थी। चौधराइन का आदेश फ़िर गूँजा " गोपाल, इसे मेरे साये से साफ कर दे।" गोपाल साया लेकर चूत के अन्दर बाहर साफ करने लगा। गोपाल के लण्ड को सहलाते हुये मायादेवी बोली," गोपाल में बहुत दम है...मेरा सारा दर्द खत्म हो गया।" फिर उसने गोपाल से पूछा,"क्यों रे, तुझे कैसा लगा..?" गोपाल “जी बहुत अच्छा मालकिन। फ़िर उन्होंने गोपाल से कहा कि वो उसे बहुत पसन्द करती है और उसने चुदाई भी बहुत अच्छी की। पर उन्होंने गोपाल को धमकाया कि अगर वो किसी से भी इसके बारे में बात करेगा तो वो बड़े मालिक (बड़े चौधरी काका) से बोल गाँव से निकलवा देगी और अगर चुप रहेगा तो हमेशा गोपाल का लण्ड चूत में लेती रहेगी। गोपाल ने कसम खाई कि वो किसी से कभी चौधराइन मालकिन के बारे में कुछ नहीं कहेगा। ग़ोपाल बहुत खुश हुआ जब चौधराइन ने उससे कहा कि वो जल्दी ही फिर उससे चुदवाने के लिए बुलवायेगी। मायादेवी ने उसे चूमा और कपड़े पहन कर बाहर जाने का आदेश दिया। मदन ने गोपाल से कहा कि वो आंगन में जाकर अपना काम करे। गोपाल के जाते ही मदन ने दरवाजा अन्दर से बन्द किया और फटाफट नंगा हो गया। लण्ड चोदने के लिये बेकरार था ही। चौधराइन ने नजदीक बुलाया और लण्ड पकड़ कर आश्चर्य से देख सहलाते हुए नखरे से कहने लगी, "हाय आज मुझे मत चोद क्यों कि अभी अभी मैने चुदवाया है और दोपहर में तेरे बाप से भी चुदवाना है। तू घर की जिस किसी भी लड़की को चोदना चाहे, मैं चुदवा दूंगी..।" मदन ने कोई जवाब न दे उन्हें लिटा दिया और उनकी दोनों टाँगे अपने कन्धों पर रख लीं जिससे उनकी चूत ऊपर को उभर आयी और दोनों फांके खुलकर लण्ड को दावत सी देने लगीं। मदन ने अपने लण्ड का सुपाड़ा चौधराइन की चूत के मुहाने पर दोनों फांकों के बीच रखा और धक्का मारते हुए कहा –“मेरे बाप से चुदवाना है तो क्या आपकी चूत मेरा लण्ड अन्दर लेने से मना कर देगी।” गीली चूत मे लण्ड का सुपाड़ा पक से अन्दर घुस गया चौधराइन "आह्ह्ह्ह्ह..... शाबाश ।" मदन फ़िर बोला, “देखा कैसे बिना आना कानी किये घुस गया न।” "आअह्ह्ह्ह्ह्ह....मजा आआआअ ग...याआअ.." मदन चौधराइन के खरबूजों को थाम कर चोदने लगा।

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03-18-2013, 05:43 AM
Post: #137
RE: चौधराईन
"चौधराइन, अगर मुझे मालूम होता कि आप इतनी चुदासी रहती हो तो मैं 4-5 साल पहले ही चोद डालता, " कहते हुये मदन ने हुमच कर धक्का मारा। चौधराइन ने कमर उठा कर नीचे से धक्का मारा और गाल पकड़कर नोचते हुए बोली," "आह्ह्ह्ह्ह..... शाबाश बेटा, वो तो तुझसे चुदवाने के बाद मैने जाना कि लड़कों से चुदवाने का अलग मजा होता है । मदन ने धक्का मारते मारते चौधराइन को चूमते हुए बोला "सच बोल, चौधराइन चाची गोपाल के साथ चुदाई में मजा आया क्या?" मदन का लौड़ा अब आराम से उनके भोसड़े में अन्दर-बाहर हो रहा था। "सच बोलूं बेटा, पहले तो मैं भी घबरा रही थी कि मैं इत्ती सी उम्र के लड़के के सामने रन्डी जैसी नंगी हो गई हूँ लेकिन अगर वो नहीं चोद पाया तो !" चौधराइन ने गोपाल को याद कर चूतड़ उछाले और कहा," गोपाल ने खूब जम कर चोदा, लगा ही नहीं कि वो पहली बार चुदाई कर रहा है.. मैं मस्त हो गई और अब मैं उससे अक्सर चुदवाया करूँगी।" "और मैं चौधराइन चाची?" मदनने उसके टमाटर से गालों को चूसते हुये पूछा। "बेटा, तेरा लौड़ा तो मस्त है ही और तेरे में गोपाल से ज्यादा दम भी है....मजा आ रहा है...." और उसके बाद दोनों जम कर चुदाई करते रहे और आखिर में मदन के लण्ड ने चौधराइन के चूत में पानी छोड़ दिया। दोनों हांफ रहे थे। कुछ देर के बाद जब ठण्डे हो गये तो मदन ने उनकी चूत की फ़ूली फ़ाँके हथेली में दबोच कर कहा–“आज पता चला चाची कि आप इस रजिस्टर के हिसाब किताब के लिये अक्सर यहाँ आती हैं।” चौधराइन –“अरे नहीं बेटा अभी तक सिर्फ़ चार नाम ही तो चढ़े हैं एक तेरा बाप सदानन्द दूसरा चौधरी साहब मेरे पति, तीसरा तू औ आज ये चौथा गोपाल बस ।” मदन–“वाह चाची! चार तो ऐसे कह रही हो जैसे बहुत कम हैं। चौधराइन –“अरे बेटा क्या करूँ ये चूत साली ऐसा रजिस्टर है कि भरता ही नहीं ।” मदन मुट्ठी में दबोची उनकी फ़ूली चूत की फ़ाँकों के बीच उँगली चुभोते हुए बोला, “कोई बात नहीं चाची अब मैं इस रजिस्टर की देखभाल किया करूंगा और कोई पन्ना खाली न जाने दूँगा।” चौधराइन हँसकर घर चली गयीं।

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03-18-2013, 05:43 AM
Post: #138
RE: चौधराईन
कहने को तो मदन जोश में कह गया पर चौधराइन के जाने के बाद उसके दिमाग ने सोचा कि ये मैंने चौधराइन से ये कैसा बेवकूफ़ी भरा वादा कर लिया इस तरह तो मैं दिनरात इनकी चूत ठन्डी करने में ही लगा रहूँगा और इस गाँव में भरी तरह तरह कि चूतों का स्वाद न ले पाऊँगा। पर जल्दी ही उसके शैतानी दिमाग को एक शान्दार आइडिया सूझ गया। हुआ यों कि एक दिन एक नये नये जवान हुए चिकने लड़के चिन्टू को ले उसकी भरी पूरी गदराई जवान खूबसूरत माँ चम्पा मदन के पास आई। चम्पा –“मदन बेटा, ये मेरा लड़का चिन्टू पढ़ता लिखता तो है नहीं दिनभर शैतानी करता रहता है। आप चौधराइन से कह के इसे किसी काम पे लगा दो तो धीरे धीरे कुछ सीख जायेगा और बड़ा होने तक अपनी रोजी रोटी तो कमा ही लेगा।” मदन उन्हें ले के चौधराइन के पास गया और सारी बात बताई ।” सारी बात सुन चौधराइन ने माँ बेटे को थोड़ी देर बाहर बैठ इन्तजार करने के लिए बोल मदन को सलाह करने के लिए अन्दर बुलाया। चौधराइन –“लौंडा है तो मेरे रजिस्टर में दर्ज करने लायक मदन –“और उसकी माँ मेरे खाते लायक। चौधराइन –“क्या बकता है।” मदन –“क्यों मेरा मन नही होता नये नये तजुर्बे करने का? चौधराइन –“पर तूने तो मुझसे वादा किया था कि अब तू अपनी ताकझाँक बन्द कर देगा।“ मदन –“तब आपने रजिस्टर कहाँ खोला था? चौधराइन –“पर जरा संभल के। मदन –“ आप फ़िक्र न करो। तो आज से तय रहा जो लड़का आपका उसकी माँ बहन मेरी।” चौधराइन –“ठीक है। बुलाओ।” मदन ने माँ बेटे को अन्दर बुलाय। चौधराइन –“ठीक है। शुरू में मैं इसे हल्का काम दूँगी ताकि इसे काम करने की आदत पड़े। इसे आज रात भेज देना पँचायतघर की रखवाली करने। इसे सिर्फ़ वहाँ सोना है। ” दोनों खुशी खुशी चले गये । उस रात जब चौधराइन ने चिन्टू से अपनी चूत जम के बजवाई तो चौधराइन के करतब देख देख मदन भी बहुत उत्तेजित हो गया और उसने भी चौधराइन की चूत धुन डाली। चुदाई से निबट करीब रात के दो बजे जब मदन बगिया वाले मकान पर जा रहा था तो सोच रहा था कि चौधराइन ने तो हरी झन्डी दे दी पर चिन्टू की अम्मा चम्पा फ़ँसानी तो खुद मुझे ही पड़ेगी ।” भगवान ने खुद ही इसका रास्ता दिखा दिया। हुआ यों कि तीसरे दिन करीब एक बजे दोपहर में चम्पा मदन के पास बगिया वाले मकान पर आई और मदन –“ आओ चम्पा चाची। कहो कैसी हो?” चम्पा –“मैं तो ठीक हूँ पर चिन्टू बड़ा थका थका रहता है । ऐसा क्या काम कराती है चौधराइन?” मदन –“कुछ नहीं बस पँचायत घर में सोता है।” चम्पा(हँसकर) –“अरे सोने से कहीं कोई थकता है बेटा।” मदन ने सोचा हँस रही है क्यों न इसका मन टटोलने के देखे सो बोला –“क्यों तुम रात में सोती हो तो नहीं थकती क्या या चन्दू(चम्पा का पति) चाचा नहीं थकते ।” चम्पा उसका दोहरा मतलब समझ गयी, उसके मन में गुदगुदी सी हुई क्योंकि उसने भी गाँव में मदन के कारनामों की कहानियाँ सुनी थीं हँस के बोली –“अरे मेरी बात और है मैं तो तुम्हारे चन्दू चाचा के मारे……वो भी कभी जब वो मुझे……हटो। क्या फ़ालतू बात ले……।” यह बोलते बोलते चम्पा शर्मा के चुप हो गई। फ़िर संभल के आगे बोली –“ पर वो तो अकेला…।” और वो फ़िर शर्मा गई। मदन मजाक के ढ़ंग से –“कौन जाने शायद चौधराइन चाची साथ में……।” चम्पा हँसते हुए –“ क्या मजाक करते हो बेटा कहाँ चौधराइन कहाँ जरा सा बच्चा।” मदन मुस्कुराकर –“ जरा सा बच्चा क्यों। मेरी ही उमर का होगा और चौधराइन चाची तुम्हारी उमर की।” चम्पा भी अब शर्म छोड़ पूरी तरह बहस के मूड में आ गयी थी मुस्कुरा के बोली –“हाँ माना तेरी ही उमर का है पर हम बुढ़ियों और तेरी उमर वाले का क्या तालमेल? मदन आश्चर्य प्रकट करते हुए –“तुम्हें बुढ़िया बताने वाले को मैं अन्धा ही कहूँगा । मुझे तो ताज्जुब है कि तुम और चन्दू चाचा रोज क्यों नहीं थकते । चाचा शायद तुम्हें नाजुक समझ के………।” चम्पा –“ चुप कर बेटा ये सब कोई रोज रोज थोड़े ही………।” मदन –“ये तो अगर मैं चन्दू चाचा होता तो बताता।” पता नही बात चीत की झोंक में या शायद जानबूझ के चम्पा कह गई –“अच्छा तो तू आज बता ही दे।” बस मदन ने चम्पा चाची का गदराया बदन बाहों में भर लिया उसकी मजबूत बाहों के उमंग भरे कसाव में चम्पा को एक अनोखा अनुभव हुआ पर उसने छूटने की एक कमजोर सी कोशिश की –“छोड़ बेटा क्यों मजाक करता है।” इसबार मदन ने गम्भीर आवाज और चमकती आँखों से चम्पा चाची की उत्तेजना के खुमार से भरती आँखों में झाँक के कहा –“ये मजाक नहीं है चाची यही तो मैं साबित करना चाहता हूँ।” ऐसा बोलते हुए मदन चम्पा चाची को लिए लिए ही बिस्तर पर गिर पड़ा। चम्पा उत्तेजना से काँपती आवाज में–“ अरे अरे कहीं कोई आ गया तो…………? आगे का वाक्य चम्पा के मुँह में ही घुट गया क्यों कि मदन ने उसके होठों को अपने होठों मे दबा लिया नये जवान होते लड़के का जिस्म और की बाँहो का कसाव चम्पा को अपने चढ़ती जवानी की याद दिला रहा था वो अपना आपा खोती जा रही थी और मदन से लिपटती जा रही थी एक दूसरे के होठों को चूसते चूसते कब दोनों के जिस्म से कपड़े उतर गये पता ही नहीं चला । जब दोनों के होठ अलग हुए तो बुरी चम्पा ने हाँफ़ते हुए मदन से कहा –“क्या सचमुच मैं अभी भी तेरे जैसे जवान लड़के को लुभाने लायक हूँ।” मदन चम्पा चाची के ऊपर से उठ के बैठ गया और एक भरपूर नजर बिस्तर पर नंगधड़ंग पड़ी चम्पा चाची पर डाली और बोला –“मैं झूठ नहीं बोलूँगा दरअसल मेरी उमर के लड़कों को नईजवान लड़कियों से औरतें ज्यादा पसन्द आती हैं और औरतों में आप बेजोड़ हैं।”

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03-18-2013, 05:44 AM
Post: #139
RE: चौधराईन
चम्पा चाची –“अगर तू सच कहता है तो ताज्जुब नहीं रोज रात में चौधराइन मेरे चिन्टू को चूस डालती हो।” मदन –“अरे छोड़ो चाची दोनो साले मजा करते होंगे अभी थोड़ी देरे में तुमको मेरी बात का विश्वास हो जायेगा।” ये कह मदन ने अपने दोनों हाथों से उनकी केले के खम्बों जैसी जाँघें पकड़ के फ़ैलायी और अपने फ़ौलादी लण्ड का सुपाड़ा उनकी फ़ूली हुई चूत के रसीले मुहाने पर रखा । फ़िर अपने दोनों हाथों में उनकी बड़े बड़े खरबूजों जैसी चूचियाँ थाम के धक्का मारा। चम्पा के मुँह से निकला –“आआह्ह्ह! सुपाड़ा अन्दर जा चुका था पर इसके बाद मक्कार मदन रुक गया और चम्पा चाची की बड़े बड़े खरबूजों जैसी चूचियाँ दबा दबाके निपल ऐसे चूसने लगा जैसे कोई आम चूस के खाता है। उसकी इस हरकत से उत्तेजित हो चम्पा ने अपने भारी चूतड़ उछाल उछाल के उसका पूरा लण्ड अपनी चूत में धाँस लिया और झुँझला के फ़ुसफ़ुसाई –“अगर तू ऐसे करता रहा तो मैं बिना चुदे बिना थके ही झड़ जाऊँगी। फ़िर तू साबित कैसे करेगा कि तू चम्पा चाची को थका सकता है।” बस मदन इसी बेकरारी का तो इन्तजार कर रहा था उस भरी दोपहरी में बगिया के उस एकान्त मकान में मदन ने चम्पा चाची के जिस्म और दिमाग को अपनी जोशखरोश से भरी चुदाई से इतना मजा दिया कि वो अपने घर ऐसे थिरकते हुए लौट रही थीं जैसे कि वो एक बार फ़िर जवान हो गई हों। चम्पा चाची ने शाम को अपने पति (चन्दू) के आने पर उन्होंने बड़ी आवभगत की और रात में खुद पहल कर चन्दू चाचा को चुदाई के लिए उकसाया। दोपहर में जो कुछ मदन की चुदाई से सीखा था वो सब चन्दू चाचा के साथ फ़िर से दोहरा के आजमाया। चन्दू को बहुत मजा आया और बड़ा आश्चर्य हुआ। चुदाई के बाद उसने पूछा –“आज तू बड़ी खुश है चम्पा।” चम्पा चन्दू के बालों भरे चौड़े सीने पर हाथ फ़ेरते हुए –“ खुश क्या चिन्टू की चिन्ता दूर हुई वैद्यजी(सदानन्द) के लड़के ने चौधरी के यहाँ लगवा दिया।” चन्दू –“कौन वो मदन?” चम्पा बोली –“हाँ वही। मुझे तो बड़ा सीधा लगता है पर लोग तो पता नहीं क्या क्या कहते हैं।” चन्दू –“हाँ ताज्जुब तो मुझे भी है मैं एक गरीब किसान हुँ पर हमेशा आते जाते अपनी तरफ़ से चाचा राम राम कहना कभी नहीं भूलता । मुझे लगता है चौधरी की बगिया में जो चोर नौकर थे वो ही बदनाम करते हैं क्यों कि सालों को मदन ने निकाल दिया।” चम्पा मुस्कुराई और मन ही मन सोंचा अब तो और भी राम राम करेगा –“खैर हमें क्या अपना लड़का ठिहे से लग गया।” चन्दू उसकी चूत पर हाथ फ़ेर कर –“ठीक बात क्यों न इसी खुशी में बार और हो जाये चम्पा ने उसके लण्ड पर हाथ रखा –“हाय दैया! ये तो फ़िर खड़ा हो गया।” चन्दू चम्पा के ऊपर आ के सुपाड़ा चूत पर लगाते हुए–“खुशी मना रहा है न।“ चम्पा की इतनी चुदाई शादी वाली रात भी नहीं हुई थी जितनी आज हुई। अगले दिन खेत पर जाते समय चन्दू मदन से मिल उसका आभार प्रकट करते हुए गया। मदन ने चन्दू को इतना खुश कभी नहीं देखा था।

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03-18-2013, 05:44 AM
Post: #140
RE: चौधराईन
उसी दिन चम्पा चाची ने मदन को मिल रात के किस्से की जानकारी दी तो मदन की समझ मे सारा माजरा आया वो हँसते हुए बोला –“ वाह चाची भतीजे से सीख चाचा पे आजमाया और उन्हें खुश भी कर दिया। तुमने कमाल कर दिया। चम्पा –“कमाल तो तूने कर दिया हमें खुश रहना सिखा दिया। सारे करतब तेरे ही तो सिखाये हुए हैं ।” मदन –“मिलती रहा करो, चाची ऐसे ऐसे करतब बताऊँगा कि चाचा को आप जन्नत की हूर लगेंगी।” चम्पा –“जुग जुग जियो बेटा। आज तो नही परसों दोपहर एक बजे आऊँगी।” मदन –“ठीक है चाची।” तो इस तरह शुरू हुई चौधराइन की चूत की चौधराहट। अब हाल ये है कि चौधराइन को कोई नया शिकार मिले, तो उसके घर की औरते माँ बहन जो भी मदन को पसन्द आ जाय, चौधराइन की तरफ़ से उन्हें चोदने की छूट है और दूसरी ओर अगर गाँव की कोई औरत मदन से फ़ँस जाती हैं तो उनके लड़कों के लण्ड से चौधराइन अपनी चूत सिकवाती हैं

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